चलो मौत को गले लगा कर देखे
ज़िन्दगी से पीछा छुड़ा कर देखे,
घुट घुट कर जीने से बारहा बेहतर है
ख़ुद को सफहा ए हस्ती से मिटा कर देखे,
जब कोई हसरत नहीं जीते रहने की
फिर क्यों न ज़िन्दगी की कश्तियाँ जला कर देखे,
सुना है क़ुबूल हो जाती है हर दुआ माँगी
चलो हम भी उम्मीद कोई बंधा कर देखे,
शायद उन्हें आ जाए थोडा तरस हम पर
नदामत के चंद आँसू सही बहा कर देखे..!!
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