सुनाता है कोई भोली कहानी

sunaata hai koi bholi kahani

सुनाता है कोई भोली कहानी महकते मीठे दरियाओं का पानी, यहाँ जंगल थे आबादी से पहले सुना है

पत्थर का वो शहर भी क्या था

patthar ka wo shahar bhi kya tha

पत्थर का वो शहर भी क्या था शहर के नीचे शहर बसा था, पेड़ भी पत्थर फूल भी

फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के

phool khushboo se juda hai ab ke yaaro

फूल ख़ुश्बू से जुदा है अब के यारो ये कैसी हवा है अब के ? दोस्त बिछड़े हैं

मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले

mumkin nahi mataa e sukhan mujh se cheen le

मुमकिन नहीं मता ए सुख़न मुझ से छीन ले गो बाग़बाँ ये कुंज ए चमन मुझ से छीन

ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा

zabaan sukhan ko sukhan baankpan ko tarsega

ज़बाँ सुख़न को सुख़न बाँकपन को तरसेगा सुख़न कदा मेरी तर्ज़ ए सुख़न को तरसेगा, नए पियाले सही

तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं

teri nigaah ke jaadoo bikharte jaate hain

तेरी निगाह के जादू बिखरते जाते हैं जो ज़ख़्म दिल को मिले थे वो भरते जाते हैं, तेरे

नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं

naseeb e ishq dil e be qarar bhi to nahi

नसीब ए इश्क़ दिल ए बे क़रार भी तो नहीं बहुत दिनों से तेरा इंतिज़ार भी तो नहीं,

बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले

bane banaye hue raaston pe jaa nikale

बने बनाए हुए रास्तों पे जा निकले ये हमसफ़र मेरे कितने गुरेज़ पा निकले, चले थे और किसी

ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा

khwab me raat hum ne kya dekha

ख़्वाब में रात हम ने क्या देखा आँख खुलते ही चाँद सा देखा, कियारियाँ धूल से अटी पाईं

साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन

saaz e hastee kee sada gaur se sun

साज़ ए हस्ती की सदा ग़ौर से सुन क्यूँ है ये शोर बपा ग़ौर से सुन, दिन के