मेरे दुख की कोई दवा न करो

मेरे दुख की कोई दवा न करो
मुझको मुझ से अभी जुदा न करो,

नाख़ुदा को ख़ुदा कहा है तो फिर
डूब जाओ ख़ुदा ख़ुदा न करो,

ये सिखाया है दोस्ती ने हमें
दोस्त बन कर कभी वफ़ा न करो,

इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं
चंद लम्हों में फ़ैसला न करो,

आशिक़ी हो कि बंदगी फ़ाकिर
बेदिली से तो इब्तिदा न करो..!!

~सुदर्शन फ़ाकिर


Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply