तजुर्बे के दम पर दीवानों ने कहा था इश्क़ बुरा है
मगर जुनूँ ए इश्क़ में ये बात मुझे समझ आई नहीं,
उसके बेरुखी के सबब हो गई तन्हाइयों से दोस्ती
बाद बज़्म ए जानाँ हमने कोई महफ़िल सजाई नहीं,
दुनियाँ की नज़र में हमारा हो कर भी जो हमारा नहीं
उस ला हासिल तमन्ना को खोने में कोई बुराई नहीं,
एक एक कर के राख हो गई उसकी याद ए रफ़्तगाँ
फक़त एक उसकी तस्वीर हमने बटुए से हटाई नहीं..!!
~नवाब ए हिन्द
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