मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे
वो ये कहती है तू दोस्ती छोड़ दे,

मैं ये कहता हूँ मुझ को दिवाना बना
वो ये कहती है दीवानगी छोड़ दे,

जब मैं तारीफ़ करता हूँ उस की कभी
तब वो कहती है बस शाइ’री छोड़ दे,

जब कभी दिल की बातें बताता हूँ मैं
तब वो कहती है अब दिल लगी छोड़ दे,

जब मैं कहता हूँ है जान हाज़िर मेरी
वो ये कहती है अब जाँ मेरी छोड़ दे,

जब मैं कहता हूँ जीना है मुश्किल बहुत
तब वो कहती है जा ज़िंदगी छोड़ दे..!!

~सबीहुद्दीन शोऐबी

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर

Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

1 thought on “मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे”

Leave a Reply