जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई
पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई ?
शब बसर करनी है,महफूज़ ठिकाना है कोई ?
कोई जंगल है यहाँ पास में ? सेहरा है कोई ?
वैसे सोचा था मुहब्बत नहीं करनी मुझे
इस लिए की कि कभी पूछ ही लेता है कोई,
आपकी आँखें तो सैलाब ज़दा ख़ित्ते हैं
आपके दिल की तरफ़ दूसरा रस्ता है कोई ?
दुःख मुझे इसका नहीं है कि दुखी है वो शख्स
दुःख तो ये है कि सबब मेरे अलावा है कोई,
दो मिनट बैठ, मैं बस आईने तक हो आऊँ
उसमे इस वक़्त मुझे देखने आता है कोई ,
खौफ़ बोला ! कोई है ? जिसको बुलाना है ! बुला
देर तक सोच के मैं जोर से चीखा ! है कोई ??
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