ज़िन्दगानी के काम एक तरफ़
अक़द का इंतज़ाम एक तरफ़,
हां मुहब्बत का नाम एक तरफ़
साज़ो सामां तमाम एक तरफ़,
हुस्न पत्थर मिज़ाज ख़ूब रहे
हुस्न का एहतराम एक तरफ़,
एक तरफ़ है अदालतों की क़तार
हाकिम ए बेलगाम एक तरफ़,
मेरी तनहाईयां वहीं की वहीं
शहर का इंतज़ाम एक तरफ़,
दुश्मनों का मिज़ाज और कहीं
दोस्त का इंतक़ाम एक तरफ़,
साथ तेरा मिला है जब से मुझे
रख दिया हर निज़ाम एक तरफ़,
आक़िलों की मिसाल और सही
बे ख़ुदी का कलाम एक तरफ़,
लुत्फ़ क्या है ख़्याल तू ही बता
रख दो गर बाद ओ जाम एक तरफ़..!!
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