एक ही धरती हम सब का घर जितना तेरा उतना मेरा
दुख सुख का ये जंतर मंतर जितना तेरा उतना मेरा,
गेहूँ चावल बाँटने वाले झूटा तौलें तो क्या बोलें
यूँ तो सब कुछ अंदर बाहर जितना तेरा उतना मेरा,
हर जीवन की वही विरासत आँसू सपना चाहत मेहनत
साँसों का हर बोझ बराबर जितना तेरा उतना मेरा,
साँसें जितनी मौजें उतनी सब की अपनी अपनी गिनती
सदियों का इतिहास समुंदर जितना तेरा उतना मेरा,
ख़ुशियों के बटवारे तक ही ऊँचे नीचे आगे पीछे
दुनिया के मिट जाने का डर जितना तेरा उतना मेरा..!!
~निदा फ़ाज़ली
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