तड़प रहा है दिल ए बे क़रार आ जाओ
बस एक बार ऐ जान ए बहार आ जाओ,
तुम्हारे आने से लौट आएगी चमन में बहार
ख़िज़ाँ उड़ाने लगी है ग़ुबार आ जाओ,
लगा दी आग गुलिस्ताँ में दुश्मनों ने मगर
बुझाएँ आग जो हैं जाँ निसार आ जाओ,
हैं घर के सारे दरीचे ही वा तुम्हारे लिए
तसव्वुरात की दुनिया में यार आ जाओ,
न छूट जाए कहीं अब ये ज़ब्त का दामन
न जाओ रूठ के जान ए बहार आ जाओ,
सहर का तारा भी शाहीन कह रहा है यही
गुज़र न जाए शब ए इंतिज़ार आ जाओ..!!
~उस्मान शाहीन
जब भी ख़ल्वत में मेरी शम्अ जली शाम के बाद
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