दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो

दर्द हो या कि रंज़ ओ गम हर हाल में मुस्कुराते चलो
गैरों की ख़ुशी की खातिर रस्म ए दुनिया निभाते चलो,

अहल ए सियासत ने इंसानियत को मौक़ूफ़ बना रखा है
तुम अहल ए वतन को इंसानियत का सबक़ पढ़ाते चलो,

मुक़ाबला ही क्या मुर्दा ज़मीरो से अहल ए ईमां वालो का
तुम हर हाल में अहल ए ईमां बनो ईमान जगाते चलो..!!


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