जो मिला उससे गुज़ारा न हुआ
जो हमारा था, वो हमारा न हुआ,
हम किसी और से मंसूब हुए
क्या ये नुक़सान तुम्हारा न हुआ,
बे तक़ल्लुफ़ भी वो हो सकते थे
मगर हमसे कोई इशारा न हुआ,
दोनों ही एक दूसरे पर मरते रहे
कोई भी अल्लाह को प्यारा न हुआ..!!
Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

























