ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब

ye kya rut hai ab kee rut me dekhe zard gulab

ये क्या रुत है अब की रुत में देखें ज़र्द गुलाब चेहरे सूखे फूल ख़िज़ाँ के आँखें ज़र्द

गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ

gardish e sagar subu ke darmiyan

गर्दिश ए साग़र सुबू के दरमियाँ ज़िंदगी है हाओ हू के दरमियाँ, ज़ख़्म और पोशाक भी रखे गए

दिल को तेरे ध्यान में रखा

dil ko tere dhyaan me rakha

दिल को तेरे ध्यान में रखा शोर सूने मकान में रखा, हर तरफ़ आइने बिछाए और एक चेहरा

वो दूर ख़्वाबों के साहिलों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के

wo door khwabon ke saahilon me azaab kis ke hain khwab kis ke

वो दूर ख़्वाबों के साहिलों में अज़ाब किस के हैं ख़्वाब किस के ये कौन जाने कि अब

जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या

jahan vaham o gumaan ho jayega kya

जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा क्या ? सितारे धूल और

कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है

koi saya achche saaee dhoop bahut hai

कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है मर जाऊँगा अच्छे साईं धूप बहुत है, साँवली रुत में ख़्वाब

उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को

ujaad ankhon me rat jagon ka azaab utra hai neem shab ko

उजाड़ आँखों में रत जगों का अज़ाब उतरा है नीम शब को जो दर्द जागा है शाम ढलते

वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा

wo kisi bhi aks e jamal me nahi ayega

वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा वो जवाब है तो सवाल में नहीं आएगा, नहीं

गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है

galiyon ki bas khaaq uda ke jaana hai

गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है हम को भी आवाज़ लगा के जाना है, रस्ते में

जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं

jinhen hum kah nahi paaye wo baaten yaad aati hain

जिन्हें हम कह नहीं पाए वो बातें याद आती हैं गुज़शता ना मुलाक़ातों की यादें याद आती हैं,