वो किसी भी अक्स ए जमाल में नहीं आएगा
वो जवाब है तो सवाल में नहीं आएगा,
नहीं आएगा वो किसी भी हर्फ़ ओ बयान में
वो किसी नज़ीर ओ मिसाल में नहीं आएगा,
उसे ढालना है ख़याल में किसी और ढब
वो शबाहत ओ ख़द ओ ख़ाल में नहीं आएगा,
वो जो शहसवार है तेग़ ज़न रह ए ज़िंदगी
मेरे साथ वक़्त ए ज़वाल में नहीं आएगा,
यहाँ कौन था जो सलामती से गुज़र गया
यहाँ कौन है जो वबाल में नहीं आएगा ?
उसे लाऊँगा मैं सुकूत ए हर्फ़ ओ सदा में भी
वो सुख़न कभी जो सवाल में नहीं आएगा,
जो हैं मुंतज़िर बड़ी देर से उन्हें क्या ख़बर
नहीं आएगा किसी हाल में नहीं आएगा..!!
~नून मीम दनिश
गलियों की बस ख़ाक उड़ा के जाना है
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