जहाँ वहम ओ गुमाँ हो जाएगा क्या
यहाँ सब कुछ धुआँ हो जाएगा क्या ?
सितारे धूल और मिट्टी बनेंगे
समुंदर आसमाँ हो जाएगा क्या ?
तुम्हारा इश्क़ तो ला हासिली है
ये ग़म भी राएगाँ हो जाएगा क्या ?
यूँ सर पर हाथ रख कर चल रहे हो
तो इस से साएबाँ हो जाएगा क्या ?
ये मेरा इख़्तिताम ए ज़िंदगी भी
कहीं पे दरमियाँ हो जाएगा क्या ?
किसी का दुख समझता ही नहीं जो
ज़माना मेहरबाँ हो जाएगा क्या ?
बहुत कुछ है यहाँ कहने के लाएक़
मगर सब कुछ बयाँ हो जाएगा क्या ?
हाँ आदम की निशानी है ये इंसाँ
मगर ये बे निशाँ हो जाएगा क्या ?
मुझे मरना तो है इक रोज़ दानिश
मगर ये ना गहाँ हो जाएगा क्या..??
~नून मीम दनिश
कोई साया अच्छे साईं धूप बहुत है
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