मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने

mohabbat hi na jo samjhe wo zalim pyar kya jaane

मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने निकलती दिल के तारों से जो है झंकार

तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया

tu ne apna jalwa dikhaane ko jo naqab munh se utha diya

तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया वहीं महव ए हैरत ए बे

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही

kahan galat galat to chupana sahi sahi

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही, ये सुब्ह सुब्ह

फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा

firoon dhoondhta maykada tauba tauba

फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा मुझे आज कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है, सलामत रहे तेरी आँखों की मस्ती

फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना

fasl e gul hai saja hai maykhana

फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना चल मेरे दिल खुला है मयख़ाना, शाम के वक़्त बैठने के

सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा

sahar qareeb hai taaro ka haal kya hoga

सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा अब इंतिज़ार के मारों का हाल क्या होगा ? तेरी

गुलाब आँखें शराब आँखें

gulab aankhen sharab aankhen

गुलाब आँखें शराब आँखें यही तो हैं ला जवाब आँखें, इन्हीं में उल्फ़त इन्हीं में नफ़रत सवाल आँखें

निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं

nigaah barq nahi chehra aftab nahi

निगाह बर्क़ नहीं चेहरा आफ़्ताब नहीं वो आदमी है मगर देखने की ताब नहीं, गुनह गुनह न रहा

दिल गया दिल लगी नहीं जाती

dil gaya dil lagi nahi jaati

दिल गया दिल लगी नहीं जाती रोते रोते हँसी नहीं जाती, आँखें साक़ी की जब से देखी हैं

ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है

zamana hai ki guzra jaa raha hai

ज़माना है कि गुज़रा जा रहा है ये दरिया है कि बहता जा रहा है, वो उट्ठे दर्द