कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ?

kaun kahta hai ki pee kar door ho jate hai gam

कौन कहता है कि पी कर दूर हो जाते हैं ग़म ? और याद आती हैं बातें और

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए

kya kya na saamne se zamane guzar gaye

क्या क्या न सामने से ज़माने गुज़र गए एक ग़म था जिस ने साथ न छोड़ा जिधर गए,

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए

aaraaeesh e bahaar ka saamaan kahan se aaye

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ? इंसाँ

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे

main hazar baar chahoon ki wo muskura ke dekhe

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे उसे क्या गरज़ पड़ी है जो नज़र उठा के

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ

sab ko malum hai ye baat kahan

सब को मा’लूम है ये बात कहाँ दिन कहाँ काटता हूँ रात कहाँ ? इस को तक़दीर ही

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के

kal tak ye phool rooh e ravan the bahar ke

कल तक ये फूल रूह ए रवाँ थे बहार के तुम ने अभी अभी जिन्हें फेंका उतार के,

क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस

kya abhi kahiyega mujh ko apna saudaai ki bas

क्या अभी कहियेगा मुझ को अपना सौदाई कि बस और कुछ मद्द ए नज़र है अपनी रुस्वाई कि

हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है

hum-ahal-e-dil-ka-samajhiye-qarar-baaqi-hai

हम अहल ए दिल का समझिए क़रार बाक़ी है कहीं कोई जो मोहब्बत शि’आर बाक़ी है, खुली ही

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत

kam mayassar ho jo hoti hai usi kee qeemat

कम मयस्सर हो जो होती है उसी की क़ीमत कसरत ए ग़म ने बढ़ाई है ख़ुशी की क़ीमत,

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है

nazar me sab kee meri be khudi ka aalam hai

नज़र में सब की मेरी बे ख़ुदी का आलम है किसे ख़बर कि बड़ी बेबसी का आलम है,