आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए

आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए
या’नी जुनूँ में रोज़ गरेबाँ कहाँ से आए ?

इंसाँ मिले तो दौलत ए कौनैन भी निसार
लेकिन सवाल ये है कि इंसाँ कहाँ से आए ?

जोश ए जुनूँ ब ख़ैर अब इस ग़म से छुट गए
दामन कहाँ से आए गरेबाँ कहाँ से आए ?

बच बच के लाख बाद ए बहाराँ चले मगर
उन की सी वो अदा ए गुरेज़ाँ कहाँ से आए ?

इतना भी कोई पूछने वाला नहीं रईस
हैराँ कहाँ से आए परेशाँ कहाँ से आए..??

~रईस रामपुरी

मैं हज़ार बार चाहूँ कि वो मुस्कुरा के देखे

Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

1 thought on “आराइश ए बहार का सामाँ कहाँ से आए”

Leave a Reply