अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो

apne ghar ke dar o deewar ko ooncha na karo

अपने घर के दर ओ दीवार को ऊँचा न करो इतना गहरा मेरी आवाज़ से पर्दा न करो,

मेरी आँखों को बख़्शे हैं आँसू

meri ankhon ko bakhshe hain aansoon

मेरी आँखों को बख़्शे हैं आँसू दिल को दाग़ ए अलम दे गए हैं, इस इनायत पे क़ुर्बान

हक़ीक़त का अगर अफ़्साना बन जाए तो क्या कीजे

haqiqat ka agar afsana ban jaaye to kya kijiye

हक़ीक़त का अगर अफ़्साना बन जाए तो क्या कीजे गले मिल कर भी वो बेगाना बन जाए तो

ला पिला दे साक़िया पैमाना पैमाने के बा’द

laa pila de saaqiya paimana paimane ke baad

ला पिला दे साक़िया पैमाना पैमाने के बा’द बात मतलब की करूँगा होश आ जाने के बा’द, जो

मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने

mohabbat hi na jo samjhe wo zalim pyar kya jaane

मोहब्बत ही न जो समझे वो ज़ालिम प्यार क्या जाने निकलती दिल के तारों से जो है झंकार

तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया

tu ne apna jalwa dikhaane ko jo naqab munh se utha diya

तू ने अपना जल्वा दिखाने को जो नक़ाब मुँह से उठा दिया वहीं महव ए हैरत ए बे

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही

kahan galat galat to chupana sahi sahi

कहना ग़लत ग़लत तो छुपाना सही सही क़ासिद कहा जो उस ने बताना सही सही, ये सुब्ह सुब्ह

फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा

firoon dhoondhta maykada tauba tauba

फिरूँ ढूँढ़ता मयकदा तौबा तौबा मुझे आज कल इतनी फ़ुर्सत नहीं है, सलामत रहे तेरी आँखों की मस्ती

फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना

fasl e gul hai saja hai maykhana

फ़स्ल ए गुल है सजा है मयख़ाना चल मेरे दिल खुला है मयख़ाना, शाम के वक़्त बैठने के

सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा

sahar qareeb hai taaro ka haal kya hoga

सहर क़रीब है तारों का हाल क्या होगा अब इंतिज़ार के मारों का हाल क्या होगा ? तेरी