वेद में जिनका हवाला हाशिए पर भी नहीं
वे अभागे आस्था विश्वास लेकर क्या करें ?
लोक रंजन हो जहाँ शंबूक वध की आड़ में
उस व्यवस्था का घृणित इतिहास लेकर क्या करें ?
कितना प्रतिगामी रहा भोगे हुए क्षण का यथार्थ
त्रासदी कुंठा घुटन संत्रास लेकर क्या करें ?
गर्म रोटी की महक पागल बना देती मुझे
पारलौकिक प्रेम का मधुमास लेकर क्या करें..??
~अदम गोंडवी
सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद हैं
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