तुम दूर हो तो प्यार का मौसम न आएगा
अब के बरस बहार का मौसम न आएगा,
चूमूँगा किस की ज़ुल्फ़ घटाओं को देख कर
एक जुर्म ए ख़ुश गवार का मौसम न आएगा,
छलके शराब बर्क़ गिरे या जलें चराग़
ज़िक्र ए निगाह ए यार का मौसम न आएगा,
वादा ख़िलाफ़ियों को तरस जाएगा यक़ीं
रातों को इंतिज़ार का मौसम न आएगा,
तुझ से बिछड़ के ज़िंदगी हो जाएगी तवील
एहसास के निखार का मौसम न आएगा..!!
~असद भोपाली
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