मौसम ए सर्दी में बारिश ए ख़ास चल रहा है
हमारी गलियों में मेढको का आना जाना रहेगा,
मयस्सर ना था दीदार बगैर रस्म ए मुँह दिखाई
उनका का अब सरेआम मिलना मिलाना रहेगा,
हमारे हाथो का पानी तक न था गँवारा जिन्हें
उनका ही हमारे साथ खाना, और नहाना रहेगा,
गर बनी बात महज़ दिखावे से तो ठीक वरना
टेढ़ी उंगलियों से इनका ज़ोर आज़माना रहेगा,
सफेदपोशो कि गन्दगी को छुपाने कि खातिर
वबा ए कोरोना इनके लिए बेहतर बहाना रहेगा,
कर्फ्यू के नाम पर कर के घरो में क़ैद हमको
इनके दौर ए हमदर्दी का मौसम सुहाना रहेगा,
मक़सद मुल्क को लूट कर अपने खज़ाने भरना
पर बहाना गरीबो को अधिकार दिलाना रहेगा..!!
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