तेरी जुल्फें बिखरने को घटा कह दूँ तो कैसा हो ?
तेरे आँचल के उड़ने को सबा कह दूँ तो कैसा हो ?
ब ज़ाहिर चुप हो लेकिन फिर भी आँखों में है अफ़साने
तेरी खामोशियों को भी सदा कह दूँ तो कैसा हो ?
मेरे शिकवे शिकायत पर भी मुझ से प्यार करती हो
तेरी चाहत को मैं सब से जुदा कह दूँ तो कैसा हो ?
तेरी यादें मेरे दिल पर अज़ब सा शोर करती हैं
तेरी यादों को गर मैं नशा कह दूँ तो कैसा हो ?
तुम्हारे बिन मुझे जीना बड़ा दुश्वार लगता है
तुम्हें मैं अपने जीने की वजह कह दूँ तो कैसा हो ?
जो तुम नाराज़ हो तो मुझे एक बात कहनी है
अगर मैं प्यार से तुमको वफ़ा कह दूँ तो कैसा हो ??
Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

























