मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता है…

मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता है
मुझे तक़दीर का शायद इशारा हो भी सकता है,

मिलावट झूठ की ना कर सदाक़त की तिज़ारत में
अगर ऐसा करोगे तो ख़सारा हो भी सकता है,

किसी के भी इशारे पर ये दिल तो अब नहीं चलता
मगर ये एक इशारे पर तुम्हारा हो भी सकता है,

वो ज़र्रा है मगर उसकी चमक तो आसमां तक है
सहारा तुम अगर दे दो वो तारा हो भी सकता है,

दिल ए मुज़तर को समझाया है अब मैंने यही कह कर
तख्य्यल और तसव्वुर में गुज़ारा हो भी सकता है,

अभी भी वक़्त है आदिल सभी को मुत्तहिद कर लो
जो मौका सामने है वो हमारा हो भी सकता है..!!


Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply