लोग क्या से क्या न जाने हो गए

लोग क्या से क्या न जाने हो गए
आज कल अपने ही बेगाने हो गए,

बेसबब रहगुज़र में छोड़ जाना
आजकल दोस्ती के मायने हो गए,

आदमी टुकड़ो में इतने बँट चुका
आदम के भी कितने घराने हो गए,

वक़्त ने इस कदर की तब्दीलियाँ
जो हकीक़त थे वो फ़साने हो गए..!!

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