वो जानता ही नहीं है कि मुफ़्लिसी क्या है ?

वो जानता ही नहीं है कि मुफ़्लिसी क्या है ?
गुज़र रही है जो मुश्किल से ज़िन्दगी क्या है ?

ना मिले रोटियाँ कभी उसे जो कि हो भूखा
वही ग़रीब बता सकता है कि बेकसी क्या है ?

कभी किसी मुफ़लिस जो मिलो तो पूछना
नये अमीरों को क्या मालूम सादगी क्या है ?

माँ के होते हुए हाथ न उठे थे कभी दुआ को
उनसे पूछना बाद माँ के बँदगी क्या है.??


Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply