जितने वहशी हैं चले जाते हैं सहरा की तरफ़

jitne wahashi hai chale jaate hai sahra kee taraf

जितने वहशी हैं चले जाते हैं सहरा की तरफ़ कोई जाता ही नहीं ख़ेमा ए लैला की तरफ़,

ऐब ये है कि अपने बारे में कम सोचते हो

aeb ye hai ki apne baare me kam sochte ho

ऐब ये है कि अपने बारे में कम सोचते हो मैं नहीं जो सोचते हो तो बस हम

ये मोहब्बत अगर ज़रूरत है

ye mohabbat agar zarurat hai

ये मोहब्बत अगर ज़रूरत है ये ज़रूरत भी तो मोहब्बत है, मेरा भी दिल नहीं था रुकने का

उस ने यूँ रास्ता दिया मुझ को

us ne yun raasta diya mujh ko

उस ने यूँ रास्ता दिया मुझ को रास्ते से हटा दिया मुझ को, दूर करने के वास्ते ख़ुद

उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा

umr bhar sine me ek dard dabaye rakha

उम्र भर सीने में एक दर्द दबाए रखा एक बेनाम से रिश्ते को निभाए रखा, था मुझे वहम

लोग क्या से क्या न जाने हो गए

log kya se kya na jaane ho gaye

लोग क्या से क्या न जाने हो गए आज कल अपने ही बेगाने हो गए, बेसबब रहगुज़र में

दे के चुभते हुए सवाल हवा

de ke chubhate hue sawal hawa

दे के चुभते हुए सवाल हवा ले गई मेरे तीस साल हवा, पाँव धरती से उठ रहे हैं

ख़ुश्क मिट्टी में लहू की जो नमी आएगी

khushq mitti me lahoo ki jo nami aayegi

ख़ुश्क मिट्टी में लहू की जो नमी आएगी देखना बाग़ में फिर सब्ज़ परी आएगी, कट गई उम्र

मैं चुप हूँ और दुनिया सुन रही है

main chup hoon aur duniya sun rahi hai

मैं चुप हूँ और दुनिया सुन रही है ख़मोशी दास्तानें बुन रही है, तअज्जुब है कि एक सोने

हैरान हूँ नसीब की बख़्शिश को देख कर

hairan hoon nasib ki bakhshish ko dekh kar

हैरान हूँ नसीब की बख़्शिश को देख कर साए से अपने धूप में महरूम हैं शजर, क़ब्ज़े में