मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते

masarraton ko ye ahal e hawas na kho dete

मसर्रतों को ये अहल ए हवस न खो देते जो हर ख़ुशी में तेरे ग़म को भी समो

हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो

hum ko junoon kya sikhlaate ho

हम को जुनूँ क्या सिखलाते हो हम थे परेशाँ तुम से ज़्यादा, चाक किए हैं हम ने अज़ीज़ो

जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले

jala ke mishaal e jahan hum junoon sifaat chale

जला के मिशअल ए जाँ हम जुनूँ सिफ़ात चले जो घर को आग लगाए हमारे साथ चले, दयार

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा

tujhe kya sunaaoon main dilruba

तुझे क्या सुनाऊँ मैं दिलरुबा तेरे सामने मेरा हाल है, तेरी एक निगाह की बात है मेरी ज़िंदगी

ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो

ae dil mujhe aisi jagah le chal jahan koi na ho

ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न

आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख

aah e jaan soz kee mahrumi e taaseer na dekh

आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख हो ही जाएगी कोई जीने की तदबीर न

हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे

humare baad ab mahfil me afsaane bayaan honge

हमारे बाद अब महफ़िल में अफ़्साने बयाँ होंगे बहारें हम को ढूँढेंगी न जाने हम कहाँ होंगे, इसी

कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा

koi humdam na raha koi sahara na raha

कोई हमदम न रहा कोई सहारा न रहा हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा, शाम

हम हैं मता ए कूचा ओ बाज़ार की तरह

hum hain mataa e koocha o bazaar kee tarah

हम हैं मता ए कूचा ओ बाज़ार की तरह उठती है हर निगाह ख़रीदार की तरह, इस कू

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं

yun to apas me bigadte hai khafa hote hain

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं, हैं