ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो
अपना पराया मेहरबाँ ना मेहरबाँ कोई न हो,
जा कर कहीं खो जाऊँ मैं नींद आए और सो जाऊँ मैं
दुनिया मुझे ढूँडे मगर मेरा निशाँ कोई न हो,
उल्फ़त का बदला मिल गया वो ग़म लुटा वो दिल गया
चलना है सब से दूर दूर अब कारवाँ कोई न हो..!!
~मजरूह सुल्तानपुरी
आह ए जाँ सोज़ की महरूमी ए तासीर न देख
Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


























1 thought on “ऐ दिल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ कोई न हो”