मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है

mohabbat-ehtimam-e-daar-bhi-hai

मोहब्बत एहतिमाम ए दार भी है मोहब्बत मिस्र का बाज़ार भी है, मोहब्बत मुस्तक़िल आज़ार भी है ये

एक बिखरते आशियाँ की बात है

ek bikharte aashiyaan kee baat hai

एक बिखरते आशियाँ की बात है एक शिकस्ता साएबाँ की बात है, मेरे माथे के निशाँ की बात

दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता

duee-ka-tazkira-tauhid-me-paya-nahi-jaata

दुई का तज़्किरा तौहीद में पाया नहीं जाता जहाँ मेरी रसाई है मेरा साया नहीं जाता, मेरे टूटे

किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता

kise-apna-banayen-koi-is-qaabil-nahin-milta

किसे अपना बनाएँ कोई इस क़ाबिल नहीं मिलता यहाँ पत्थर बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता, मोहब्बत

ख़ुदा जब तक न चाहे आदमी से कुछ नहीं होता

khuda-jab-tak-na-chahe-aadmi-se-kuch-nahin-hota

ख़ुदा जब तक न चाहे आदमी से कुछ नहीं होता मुझे मालूम है मेरी ख़ुशी से कुछ नहीं

ये तुझ से आश्ना दुनिया से बेगाने कहाँ जाते

ye-tujh-se-aashna-duniya-se-begaane-kahan-jaate

ये तुझ से आश्ना दुनिया से बेगाने कहाँ जाते तेरे कूचे से उठते भी तो दीवाने कहाँ जाते,

जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद

jis ko itna chaha main ne jis ko gazal me likha chaand

जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद छोड़ गया है मुझ को कैसे

जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है

jise khud se judaa rakha nahin hai

जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है वो मेरा है मगर मेरा नहीं है, जिसे खोने का मुझ

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे

main jo kahta hoon tu kajravee chhod de

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे वो ये कहती है तू दोस्ती छोड़ दे, मैं ये

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर

main ne dekha hai kaisa ye sapna naya raat ke is pahar

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर मुझ से बिछड़ा हुआ कोई अपना