कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत

kal jinhen zindagi thee raas bahut

कल जिन्हें ज़िंदगी थी रास बहुत आज देखा उन्हें उदास बहुत, रफ़्तगाँ का निशाँ नहीं मिलता एक रही

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा

sar me jab ishq ka sauda na raha

सर में जब इश्क़ का सौदा न रहा क्या कहें ज़ीस्त में क्या क्या न रहा, अब तो

जब ज़रा तेज़ हवा होती है

jab zara tez hawa hoti hai

जब ज़रा तेज़ हवा होती है कैसी सुनसान फ़ज़ा होती है, हम ने देखे हैं वो सन्नाटे भी

याद आता है रोज़ ओ शब कोई

yaad aata hai roz o shab koi

याद आता है रोज़ ओ शब कोई हम से रूठा है बे सबब कोई, लब ए जू छाँव

कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले

kuch to ehsas e ziyaan tha pahle

कुछ तो एहसास ए ज़ियाँ था पहले दिल का ये हाल कहाँ था पहले, अब तो झोंके से

अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को

avvalee chaand ne kya baat sujhaaee mujh ko

अव्वलीं चाँद ने क्या बात सुझाई मुझ को याद आई तेरी अंगुश्त ए हिनाई मुझ को, सर ए

कब तलक मुद्दआ कहे कोई

kab talak muddaa kahe koi

कब तलक मुद्दआ कहे कोई न सुनो तुम तो क्या कहे कोई ? ग़ैरत ए इश्क़ को क़ुबूल

तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं

tere milne ko bekal ho gaye hain

तेरे मिलने को बेकल हो गए हैं मगर ये लोग पागल हो गए हैं, बहारें ले के आए

ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती

khuda ke ghar sadak koi nahi jaati

ख़ुदा के घर सड़क कोई नहीं जाती चलो पैदल वहाँ लॉरी नहीं जाती, चली जाती है हँसने और

बे सबब ही इधर उधर जाता

be sabab hee idhar udhar jaata

बे सबब ही इधर उधर जाता तुम नहीं होते तो बिखर जाता, फूल की तरह तुम अगर खिलते