किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं

kis taraf kafila jana hai kahan dekhte hain

किस तरफ़ क़ाफ़िला जाना है कहाँ देखते हैं हम तो बस आप के पैरों के निशाँ देखते हैं,

हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता

haath aankhon pe rakh lene se khatra nahi jaata

हाथ आँखों पे रख लेने से ख़तरा नहीं जाता दीवार से भौंचाल को रोका नहीं जाता, दावों की

खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें

khula hai jhooth ka bazar aao sach bolen

खुला है झूठ का बाज़ार आओ सच बोलें न हो बला से ख़रीदार आओ सच बोलें, सुकूत छाया

रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर

rakha nahi tha tu ne mera dil sambhal kar

रखा नहीं था तू ने मेरा दिल सँभाल कर अब कुछ न कर सकेगा लिहाज़ा मलाल कर, रक़्साँ

जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं

janab e aali bichhadne kee koi baat nahi

जनाब ए आली बिछड़ने की कोई बात नहीं हमारे सीने में एक दिल है पाँच सात नहीं, बहुत

हाकिम ए शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे

haqim e shahar ke andaz hai hinda jaise

हाकिम ए शहर के अंदाज़ हैं हिंदा जैसे हम तो हाथों में थमा देंगे कलेजा जैसे, सख़्त मुश्किल

यूँ भरम अपनी अमीरी का बना रखा है

yun bharam apni ameeree ka bana rakha hai

यूँ भरम अपनी अमीरी का बना रखा है घर तो ख़ाली है मगर ताला लगा रखा है, आल

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी

karta hai koi ab bhi paziraaee humari

करता है कोई अब भी पज़ीराई हमारी रुस्वाई भी लगती नहीं रुस्वाई हमारी, हम देख के दुनिया भी

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ

chashm dekhoon na main us kee na hee abroo dekhoon

चश्म देखूँ न मैं उस की न ही अबरू देखूँ फिर वो क्या शय है जिसे दुनिया में

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में

wo aa ke baithe the jis waqt aashiyane me

वो आ के बैठे थे जिस वक़्त आशियाने में अमीर झाँक रहे थे ग़रीब ख़ाने में, हज़ार क़ाफ़िले