आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो

aaraaeesh e khyal bhi ho dilkusha bhi ho

आराइश ए ख़याल भी हो दिलकुशा भी हो वो दर्द अब कहाँ जिसे जी चाहता भी हो, ये

शहर सुनसान है किधर जाएँ

shahar sunsan hai kidhar jaayen

शहर सुनसान है किधर जाएँ ख़ाक हो कर कहीं बिखर जाएँ रात कितनी गुज़र गई लेकिन इतनी हिम्मत

तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें

tum aa gaye ho to kyun intizar e shaam karen

तुम आ गए हो तो क्यूँ इंतिज़ार ए शाम करें कहो तो क्यूँ न अभी से कुछ एहतिमाम

देख मोहब्बत का दस्तूर

dekh mohabbat ka dastoor

देख मोहब्बत का दस्तूर तू मुझ से मैं तुझ से दूर, तन्हा तन्हा फिरते हैं दिल वीराँ आँखें

कौन उस राह से गुज़रता है

kaun us raah se guzarta hai

कौन उस राह से गुज़रता है दिल यूँही इंतिज़ार करता है, देख कर भी न देखने वाले दिल

तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई

tere khyal se lau de uthi hai tanhaai

तेरे ख़याल से लो दे उठी है तन्हाई शब ए फ़िराक़ है या तेरी जल्वा आराई, तू किस

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे

kashti hawas hawaaon ke rukh par utaar de

कश्ती हवस हवाओं के रुख़ पर उतार दे खोए होऊँ से मिल ये दलद्दर उतार दे, बे सम्त

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर

umr bhar chalte rahe hum waqt kee talwar par

उम्र भर चलते रहे हम वक़्त की तलवार पर परवरिश पाई है अपने ख़ून ही की धार पर,

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है

khwab me manzar rah jata hai

ख़्वाब में मंज़र रह जाता है तकिए पर सर रह जाता है, आ पड़ती है झील आँखों में

तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है

taar e shabnam kee tarah soorat e khas tutati hai

तार ए शबनम की तरह सूरत ए ख़स टूटती है आस बँधने नहीं पाती है कि बस टूटती