फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे

फिर हरीफ़ ए बहार

फिर हरीफ़ ए बहार हो बैठे जाने किस किस को आज रो बैठे, थी मगर इतनी राएगाँ भी

हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने

हर सम्त परेशाँ तिरी

हर सम्त परेशाँ तिरी आमद के क़रीने धोके दिए क्या क्या हमें बाद ए सहरी ने, हर मंजिल

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है

हम-पर-तुम्हारी-चाह

हम पर तुम्हारी चाह का इल्ज़ाम ही तो है दुश्नाम तो नहीं है ये इकराम ही तो है,

सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं

सोच बदल जाती है

सोच बदल जाती है,हालात बदल जाते हैं वक्त के साथ,लोगो के ख्यालात बदल जाते हैं, इस तरह चेहरे

उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह

उजड़े हुए हड़प्पा के

उजड़े हुए हड़प्पा के आसार की तरह ज़िन्दा हैं लोग वक़्त की रफ़्तार की तरह, क्या रहना ऐसे

मैं अभी देख के आया हूँ हरे जंगल को

मैं अभी देख के आया

मैं अभी देख के आया हूँ हरे जंगल को सब्ज़ पेड़ों में भी वीरानी बहुत होती है, उन

वफ़ा की आरज़ू करना, सफ़र की जुस्तजू करना

वफ़ा की आरज़ू करना

वफ़ा की आरज़ू करना, सफ़र की जुस्तजू करना जो तुम मायूस हो जाओ, तो रब से गुफ़्तगू करना,

हर एक बात पे मुस्कुराता है झूठा

har-ek-baat-pe

हर एक बात पे मुस्कुराता है झूठा कोई गम तो है जो छुपाता है झूठा, सब ख़ुश है,

कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ

कोई सुनता ही नहीं

कोई सुनता ही नहीं किस को सुनाने लग जाएँ दर्द अगर उठे तो क्या शोर मचाने लग जाएँ,

जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई

जानता हूँ कि तुझे

जानता हूँ कि तुझे साथ तो रखते है कई पूछना था कि तेरा ध्यान भी रखता है कोई