जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ

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जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ मेरी हयात के मंज़र ज़दीद हो जाएँ, तुम्हारी चश्म ए

हम जो बे हाल ए ज़ार बैठे है…

हम जो बे हाल

हम जो बे हाल ए ज़ार बैठे है दिल की दिल में हार बैठे है, तेरी महफ़िल से

सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है

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सब के होते हुए लगता है कि घर ख़ाली है ये तकल्लुफ़ है कि जज़्बात की पामाली है,

खिड़कियाँ खोल रहा था कि हवा आएगी…

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खिड़कियाँ खोल रहा था कि हवा आएगी क्या ख़बर थी कि चिरागों को निगल जाएगी, मुझेको इस वास्ते

मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों नहीं होतीं ?

मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों

मुलाकातें हमारी बेइरादा क्यों नहीं होतीं ? मुहब्बत की गुजर कहीं कुशादा क्यों नहीं होतीं हमारे दरमियान ये

मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते…

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मेरे दिल के अरमां रहे रात जलते रहे सब करवट पे करवट बदलते, यूँ हारी है बाज़ी मुहब्बत

न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम

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न इब्तिदा की ख़बर है न इंतिहा मालूम रहा ये वहम कि हम हैं सो वो भी क्या

आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद

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आँखे बन जाती है सावन की घटा शाम के बाद लौट जाता है अगर कोई खफ़ा शाम के

मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा…

मुझको पागल कहने वाला

कोई हसीन मंज़र आँखों से जब ओझल हो जाएगा मुझको पागल कहने वाला ख़ुद ही पागल हो जाएगा,

तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता…

तभी तो मैं मुहब्बत

तभी तो मैं मुहब्बत का कही हवालाती नहीं होता जहाँ अपने सिवा कोई शख्स मुलाक़ाती नहीं होता, गिरफ्तार