जो तेरे प्यार के दरियाँ कशीद हो जाएँ
मेरी हयात के मंज़र ज़दीद हो जाएँ,
तुम्हारी चश्म ए मुहब्बत की एक झलक से यहाँ
गुलाब लम्हों से सब मुस्तफीद हो जाएँ,
एक ज़माने के बाद आई है शाम ए गम
शाम ए गम मेरे दर से कहाँ जाएगी ?
मेरी क़िस्मत में है जो तुम्हारी कमी
वो कमी मेरे दर से कहाँ जाएगी ?
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