सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं…

naa mili chhanv kahin yun to kai shazar mile

सवाद ए शाम न रंग ए सहर को देखते हैं बस एक सितारा ए वहशत असर को देखते

लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का…

sabz mausam me zard hawa dee usne

लोग कहते थे वो मौसम ही नहीं आने का अब के देखा तो नया रंग है वीराने का,

किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए…

kisi se kya kahe sune agar gubar ho gaye

किसी से क्या कहे सुने अगर गुबार हो गए हम ही हवा की ज़द में थे हम ही

अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे

ab wo jhonke kahan saba jaise

अब वो झोंके कहाँ सबा जैसे आग है शहर की हवा जैसे, शब सुलगती है दोपहर की तरह

दोस्ती को आम करना चाहता है…

dosti ko aam karna chahta hai wo khud ko neelam karna chahta hai

दोस्ती को आम करना चाहता है ख़ुद को नीलाम करना चाहता है, बेंच आया है घटा के हाथ

हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है

hum ek khuda ke bande aur ek jahan me baste hai

हम एक ख़ुदा के बन्दे है और एक जहाँ में बसते है, रब भी जब चाहे हम साथ

आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है…

आज के माहौल में इंसानियत बदनाम है ये इनाद ए बाहमी का ही फ़क़त अंजाम है, हक़ शनासी

तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी…

tukhm e nafrat bo raha hai aadmi

तुख़्म ए नफ़रत बो रहा है आदमी आदमियत खो रहा है आदमी, ज़िंदगी का नाम है जेहद ए

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो…

zindagi-ye-to-nahi-tujhko-sanvara-hi-naa-ho

ज़िंदगी ये तो नहीं तुझ को सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हम ने तेरा क़र्ज़ उतारा

ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने…

zindagi tujhko bhulaya hai bahut din hamne

ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हमने वक़्त ख़्वाबों में गँवाया है बहुत दिन हमने, अब ये