एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया

ek maqaan aur bulandi pe banane na diya

एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया हमको परवाज़ का मौक़ा ही हवा ने न दिया, तू

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई

aankh bhar aai jo kisi se mulaqat hui

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी

मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है

maine ae dil tujhe sine se lagaya hua hai

मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है और तू है कि मेरी जान को आया हुआ

शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़…

shaam apni be maza jaati hai roz

शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़ और सितम ये है कि आ जाती है रोज़, कोई दिन आसाँ

सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की

suni hai chaap bahut waqt ke guzarne ki

सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिसके भरने की, हमारे

अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती…

akele rahne ki saza qubul kar galti tumne ki hai

अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती तुमने की है मुझ पर यूँ ऐतबार न करने में भी

ख़्वाब दिखाने वाले से होशियार रहो

khwab dikhane wale se hoshiyar raho

ख़्वाब दिखाने वाले से होशियार रहो जादूगर की चालो से होशियार रहो, गाफ़िल ज़रा हुए तो सर कट

मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए

mujhko apne bank ki kitab dijiye

मुझको अपने बैंक की क़िताब दीजिए देश की तबाही का हिसाब दीजिए, गाँव गाँव ज़ख़्मी फिजाएँ हो गई

जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे…

jise ho khwahish e duniyan use sansar mil jaaye

जिसे हो ख्वाहिश ए दुनियाँ उसे संसार मिल जाए मुझे तो फक़त तुम और तुम्हारा प्यार मिल जाए,

सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको

saari basti me jaadoo nazar aaye mujhko

सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको, सदियों का