हर एक दर्द मुहब्बत के नाम होता है…

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हर एक दर्द मुहब्बत के नाम होता हैयही तमाशा मगर सुबह ओ शाम होता है, कही भी मिलता

मतलब परस्तो को क्या पता कि दोस्ती क्या है

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मतलब परस्तो को क्या पता कि दोस्ती क्या हैगुज़र गई है जो मुश्किलो में वो ज़िन्दगी क्या है,

मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता है…

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मुक़द्दर का चमकता सितारा हो भी सकता हैमुझे तक़दीर का शायद इशारा हो भी सकता है, मिलावट झूठ

एक मैं और इतने लाखों सिलसिलों के सामने

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एक मैं और इतने लाखों सिलसिलों के सामनेएक सौत-ए-गुंग जैसे गुम्बदों के सामने, मिटते जाते नक़्श दूद-ए-दम की

इक मसाफ़त पाँव शल करती हुई सी ख़्वाब में

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इक मसाफ़त पाँव शल करती हुई सी ख़्वाब मेंइक सफ़र गहरा मुसलसल ज़र्दी-ए-महताब में, तेज़ है बू-ए-शगूफ़ा हाए

एक नगर के नक़्श भुला दूँ एक नगर ईजाद करूँ…

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एक नगर के नक़्श भुला दूँ एक नगर ईजाद करूँएक तरफ़ ख़ामोशी कर दूँ एक तरफ़ आबाद करूँ,

एक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गया

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एक तेज़ तीर था कि लगा और निकल गयामारी जो चीख़ रेल ने जंगल दहल गया, सोया हुआ

ग़ैरों से मिल के ही सही बे-बाक तो हुआ…

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ग़ैरों से मिल के ही सही बे-बाक तो हुआबारे वो शोख़ पहले से चालाक तो हुआ, जी ख़ुश

है शक्ल तेरी गुलाब जैसी, नज़र है तेरी शराब जैसी..

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है शक्ल तेरी गुलाब जैसीनज़र है तेरी शराब जैसी, हवा सहर की है इन दिनों मेंबदलते मौसम के

ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं

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ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहींतू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे