नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो…

nahi hoti agar barish to patthar ho gaye hote

नहीं होती अगर बारिश तो पत्थर हो गए होते ये सारे लहलहाते खेत बंज़र हो गए होते, तेरे

सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा

sahar ne andhi gali ki taraf nahi dekha

सहर ने अंधी गली की तरफ़ नहीं देखा जिसे तलब थी उसी की तरफ़ नहीं देखा, क़लक़ था

ये जो पल है ये पिछले पल से भी भारी है

ye jo pal hai ye pichle pal se bhari hai

ये जो पल है ये पिछले पल से भी भारी है हमसे पूछो हमने ज़िन्दगी कैसे गुज़ारी है,

हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है

hamare dil pe zakhmo ka jo bab likha hai

हमारे दिल पे जो ज़ख़्मों का बाब लिखा है इसी में वक़्त का सारा हिसाब लिखा है, कुछ

एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया

ek maqaan aur bulandi pe banane na diya

एक मकाँ और बुलंदी पे बनाने न दिया हमको परवाज़ का मौक़ा ही हवा ने न दिया, तू

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई

aankh bhar aai jo kisi se mulaqat hui

आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई, दिन भी

मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है

maine ae dil tujhe sine se lagaya hua hai

मैंने ऐ दिल तुझे सीने से लगाया हुआ है और तू है कि मेरी जान को आया हुआ

शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़…

shaam apni be maza jaati hai roz

शाम अपनी बेमज़ा जाती है रोज़ और सितम ये है कि आ जाती है रोज़, कोई दिन आसाँ

सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की

suni hai chaap bahut waqt ke guzarne ki

सुनी है चाप बहुत वक़्त के गुज़रने की मगर ये ज़ख़्म कि हसरत है जिसके भरने की, हमारे

अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती…

akele rahne ki saza qubul kar galti tumne ki hai

अकेले रहने की सजा कबूल कर गलती तुमने की है मुझ पर यूँ ऐतबार न करने में भी