जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद

jis ko itna chaha main ne jis ko gazal me likha chaand

जिस को इतना चाहा मैं ने जिस को ग़ज़ल में लिखा चाँद छोड़ गया है मुझ को कैसे

जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है

jise khud se judaa rakha nahin hai

जिसे ख़ुद से जुदा रखा नहीं है वो मेरा है मगर मेरा नहीं है, जिसे खोने का मुझ

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे

main jo kahta hoon tu kajravee chhod de

मैं जो कहता हूँ तू कजरवी छोड़ दे वो ये कहती है तू दोस्ती छोड़ दे, मैं ये

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर

main ne dekha hai kaisa ye sapna naya raat ke is pahar

मैं ने देखा है कैसा ये सपना नया रात के इस पहर मुझ से बिछड़ा हुआ कोई अपना

अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी

ab ijazat de ki main hoon jaan ba lab ae zindagi

अब इजाज़त दे कि मैं हूँ जाँ ब लब ऐ ज़िंदगी मौत आती है बस अब हद्द ए

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी

musalsal mujh pe ye teri inayat maar daalegi

मुसलसल मुझ पे ये तेरी इनायत मार डालेगी कभी फ़ुर्क़त कभी इस दर्जा क़ुर्बत मार डालेगी, ग़रीब ए

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर

girne wali hai bahut jald ye sarkar huzoor

गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर, कारवाँ

रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर

rah gaya duniya me wo ban kar tamasha umr bhar

रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर जिस ने अपनी ज़िंदगी को खेल समझा उम्र

यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता

yun shahar ke bazaar me kya kya nahin milta

यूँ शहर के बाज़ार में क्या क्या नहीं मिलता पर हुस्न में सानी कोई तेरा नहीं नहीं मिलता,

सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए

sochta hoon main ki kuch is tarah rona chahiye

सोचता हूँ मैं कि कुछ इस तरह रोना चाहिए अपने अश्कों से तेरा दामन भिगोना चाहिए, ज़िंदगी की