गिरने वाली है बहुत जल्द ये सरकार हुज़ूर
हाँ नज़र आते हैं ऐसे ही कुछ आसार हुज़ूर,
कारवाँ यूँही भटकता रहे हर बार हुज़ूर
नेक निय्यत न हों गर क़ाफ़िला ए सालार हुज़ूर,
वो जो अज़ ख़ुद ही बने बैठे हैं सरदार हुज़ूर
वक़्त एक दिन उन्हें लाएगा सर ए दार हुज़ूर,
ख़ुद को देते हैं वो धोका यूँही बेकार हुज़ूर
जो ख़ताओं का नहीं करते हैं इक़रार हुज़ूर,
सामने आ के रहे सच सर ए बाज़ार हुज़ूर
कोई कितना ही करे झूट का प्रचार हुज़ूर..!!
~सबीहुद्दीन शोऐबी
रह गया दुनिया में वो बन कर तमाशा उम्र भर
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