आरज़ी ताक़तें तुम्हारी है पर ख़ुदा हमारा है
अपने अक्स पर न इतराओ आईना हमारा है,
तेरी रज़ा की खातिर गुलामी का बोझ न ढोयेंगे
क्यों कि आबरू से मरने का फ़ैसला हमारा है,
ज़िन्दगी भर तो कोई भी जंग लड़ नहीं सकता
एक दिन तुम भी टूट जाओगे तजरुबा हमारा है,
अपनी बेतरतीब रहनुमाई पर गुरुर मत करना
क्यों कि तुम से बहुत आगे नक्श ए पा हमारा है,
गैरत ए जिहाद अपनी ज़ख्म खा कर ही जागेगी
बेशक पहला वार तुम कर लो दूसरा हमारा है..!!
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