दिन रात उसके हिज्र का दीमक लगे लगे…

दिन रात उसके हिज्र का दीमक लगे लगे
दिल के तमाम ख़ाने मुझे खोखले लगे,

महफ़िल में नाम उस का पुकारा गया था
और सब लोग थे कि मेरी तरफ़ देखने लगे,

अफ़सोस फ़िक्र ए जाँ ही नहीं रहती है हमें
अफ़सोस आप जान हमें मानने लगे,

जो कहते थे कोई तुझे ठुकरा न पाएगा
जब बात ख़ुद पे आई तो वो सोचने लगे,

मैं आज तक न ठीक से ख़ुद को समझ सका
एक ही दफ़ा में आप मुझे जानने लगे..!!

~अक्स समस्तीपुरी


Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Leave a Reply