ये आसमां ज़रूरी है तो ज़मीं भी ज़रूरी है
ज़िन्दगी के वास्ते कुछ कमी भी ज़रूरी है,
हर जगह मुस्कुराना भी वाज़िब नहीं होता
कभी कभी तो आँखों में नमी भी ज़रूरी है,
चुप रहे तो लोग समझेंगे ख़तावार तुमको
यारो वक़्त बेवक्त बात करना भी ज़रूरी है,
शराफ़त से नहीं बनते हर काम आज कल
कभी कभी तो लहज़े में गरमी भी ज़रूरी है,
गर हलचल न हो तो जीने का मज़ा ही क्या ?
यारो खटपट के वास्ते दुश्मनी भी ज़रूरी है,
हर बात पे सर झुकाना अच्छा नहीं होता
गर आफतों से बचना है तो नहीं भी ज़रूरी है..!!
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