वो ज़ख़्म छोड़ो अब जिसका निशान बाक़ी नहीं

वो ज़ख़्म छोड़ो अब जिसका निशान बाक़ी नहीं
सो मेरे हक़ में कोई भी बयान बाक़ी नहीं,

बच्चे हैं फ़ासले बीच अपने सो निभाएँगे
सिवाए उन के तो कुछ दरमियान बाक़ी नहीं,

करेंगे क्या भला किरदार वो पुराने सब
पुरानी आज वो जब दास्तान बाक़ी नहीं,

ज़मीं ने पैर मेरे बाँध कर नहीं रखे
मेरी उड़ान में ही आसमान बाक़ी नहीं..!!

~नवीन जोशी

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