सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया

सादगी तो हमारी ज़रा देखिए एतिबार आप के वादे पर कर लिया
बात तो सिर्फ़ एक रात की थी मगर इंतिज़ार आप का उम्र भर कर लिया,

इश्क़ में उलझनें पहले ही कम न थीं और पैदा नया दर्द ए सर कर लिया
लोग डरते हैं क़ातिल की परछाईं से हम ने क़ातिल के दिल में ही घर कर लिया,

ज़िक्र एक बेवफ़ा और सितमगर का था आप का ऐसी बातों से क्या वास्ता
आप तो बेवफ़ा और सितमगर नहीं आप ने किस लिए मुँह उधर कर लिया,

ज़िंदगी भर के शिकवे गिले थे बहुत वक़्त इतना कहाँ था कि दोहराते हम
एक हिचकी में कह डाली सब दास्ताँ हम ने क़िस्से को यूँ मुख़्तसर कर लिया,

बेक़रारी मिलेगी मुझे न सुकूँ चैन छिन जाएगा नींद उड़ जाएगी
अपना अंजाम सब हम को मालूम था आप ने दिल का सौदा मगर कर लिया,

ज़िंदगी के सफ़र में बहुत दूर तक जब कोई दोस्त आया न हम को नज़र
हम ने घबरा के तन्हाइयों से सबा एक दुश्मन को ख़ुद हमसफ़र कर लिया..!!

~सबा अकबराबादी


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