जो शजर बे लिबास रहते हैं

जो शजर बे लिबास

जो शजर बे लिबास रहते हैं उन के साए उदास रहते हैं, चंद लम्हात की ख़ुशी के लिए

ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया

ग़म इसका कुछ नहीं

ग़म इसका कुछ नहीं है कि मैं काम आ गया ग़म ये है कि क़ातिलों में तेरा नाम

नए मौसम को क्या होने लगा है

नए मौसम को क्या

नए मौसम को क्या होने लगा है कि मिट्टी में लहू बोने लगा है, कोई क़ीमत नहीं थी

भूले से किसी और का रस्ता नहीं छूते

भूले से किसी और

भूले से किसी और का रस्ता नहीं छूते अपनी तो हर एक शख़्स से रफ़्तार जुदा है, उस

अगर ये ज़िद है कि मुझ से दुआ सलाम न हो

अगर ये ज़िद है कि

अगर ये ज़िद है कि मुझ से दुआ सलाम न हो तो ऐसी राह से गुज़रो जो राह

मसअला हुस्न ए तख़य्युल का है न इल्हाम का है

मसअला हुस्न ए तख़य्युल

मसअला हुस्न ए तख़य्युल का है न इल्हाम का है ये फ़साना ज़रा मुश्किल दिल ए नाकाम का

हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है

हमारी वजह ए ज़वाल

हमारी वजह ए ज़वाल क्या है ? सवाल ये है हराम क्या है, हलाल क्या है ? सवाल

बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही

बुग्ज़ ए इस्लाम में

बुग्ज़ ए इस्लाम में पड़े पड़े ही यहाँ कितनो के क़िरदार गिरे है, सभी मुन्सफ़ गिरे, मनसब गिरे

कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया

कितनी मोहब्बतों से पहला

कितनी मोहब्बतों से पहला सबक़ पढ़ाया मैं कुछ न जानता था सब कुछ मुझे सिखाया, अनपढ़ था और

नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का

नेक बच्चे दिल से

नेक बच्चे दिल से करते हैं अदब उस्ताद का बाप की उल्फ़त से बेहतर है ग़ज़ब उस्ताद का,