क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ?

क्यूँ ज़मीं है आज प्यासी इस तरह ?
हो रही नदियाँ सियासी इस तरह,

जान की परवाह किसे है आजकल
फैली हुई है हर सू उदासी इस तरह,

रो रहे है माँ बाप क्यूँ तन्हाइयों में ?
बढ़ रही क्यूँ ये बदहवासी इस तरह ?

कौन जाने कब मिले इसकी दवा ?
हो रही इन्सान की तलाशी इस तरह,

क्यूँ न ख़ुश रहे सब लोग इस जहाँ में
दूर हो हम सबकी उदासी इस तरह..!!


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