ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे
तू मिल गया है तो ख़ुद अपनी ज़ात से भी गए,
बिछड़ के खत भी न लिखे उदास यारों ने
कभी कभी की अधूरी सी बात से भी गए,
वो शाख शाख लचकते हुए बदन मोहसिन
मुझे तो मिल न सके तेरे हाथ से भी गए..!!
~अज्ञात
लहू में रंग ए सुख़न उस का भर के देखते हैं
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1 thought on “ख्याल था कि तुझे पा के ख़ुद को ढूँढेंगे”