ख़ुद्दार मेरे शहर का फाक़ो से मर गया
राशन जो आ रहा था वो अफ़सर के घर गया,
चढ़ती रही मज़ार पे चादरें तो बे शुमार
बाहर जो एक फ़कीर था सर्दी से मर गया,
रोटी अमीर ए शहर के कुत्तों ने छीन ली
फाक़ा गरीब ए शहर के बच्चों में बट गया,
चेहरा बता रहा था कि मारा है भूख़ ने
हाकिम ने कह दिया कि कुछ खा के मर गया..!!
Discover more from Hindi Gazals :: हिंदी ग़ज़लें - A Huge collection of Hindi/Urdu Ghazals :: हिंदी/उर्दू ग़ज़लों का विशाल संग्रह
Subscribe to get the latest posts sent to your email.

























